Best Poem of Uday Prakash

मारना
आदमी
मरने के बाद
कुछ नहीं सोचता.

आदमी
मरने के बाद
कुछ नहीं बोलता.

कुछ नहीं सोचने
और कुछ नहीं बोलने पर
आदमी
मर जाता है.
. . .
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कुतुबमीनार की ऊँचाई
कुतबुद्दीन ऎबक को
अब ऊपर से
नीचे देख पाने के लिए
चश्मे की ज़रूरत पड़ती

इतनी ऊँचाई से गिर कर
चश्मा
टूट जाता.
. . .
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